परिचय:-
भारत सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से एक, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, देश के करोड़ों परिवारों की रसोई तक स्वच्छ ऊर्जा पहुँचाने के मिशन पर है। 2025 आते-आते इस योजना ने और भी व्यापक रूप ले लिया है, जिससे देश के ऊर्जा परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। यह ब्लॉग पोस्ट उज्जवला योजना के वर्तमान स्वरूप और 2025 की दिशा में इसकी यात्रा पर एक विस्तृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगी।
उज्जवला योजना मूल उद्देश्य और यात्रा
उज्जवला योजना की शुरुआत मई 2016 में हुई थी, जिसका प्राथमिक लक्ष्य महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सुरक्षा था। इससे पहले, देश के ग्रामीण और गरीब परिवारों में खाना पकाने के लिए मुख्य रूप से लकड़ी, कोयला और अन्य ठोस ईंधन का उपयोग होता था। इन ईंधनों के धुएँ से न केवल महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते थे, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता था। उज्जवला योजना ने इन परिवारों को एलपीजी (रसोई गैस) कनेक्शन सब्सिडी के साथ उपलब्ध कराकर एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक समस्या का समाधान प्रस्तुत किया।
2025 तक का सफर विस्तार और नई पहल
शुरुआत में 5 करोड़ कनेक्शन के लक्ष्य से शुरू हुई यह योजना अपने सफल कार्यान्वयन के कारण लगातार विस्तारित होती रही। उज्जवला 1.0 के बाद उज्जवला 2.0 की शुरुआत हुई, जिसमें और अधिक परिवारों को लाभान्वित किया गया। 2025 तक आते-आते योजना ने निम्नलिखित नए आयाम जोड़े हैं:
1. सभी के लिए सुलभता: अब योजना का लाभ केवल BPL (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों तक ही सीमित नहीं है। इसे और व्यापक बनाते हुए अब देश के सभी नागरिकों के लिए खोल दिया गया है, जिससे कोई भी व्यक्ति सब्सिडी के साथ नया कनेक्शन प्राप्त कर सकता है।
2. डिजिटल पहुँच और पारदर्शिता: Ujjwala 2.0 में आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बना दिया गया है। लाभार्थी घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, सिलिंडर की बुकिंग और डिलीवरी की जानकारी मोबाइल एप्स के माध्यम से आसानी से प्राप्त की जा सकती है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।
3. स्वच्छ ऊर्जा पर बल: 2025 का लक्ष्य केवल गैस कनेक्शन बाँटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक व्यापक स्वच्छ ऊर्जा अभियान का हिस्सा बनाया गया है। सरकार का जोर इस बात पर है कि देश का हर नागरिक प्रदूषण मुक्त ईंधन का उपयोग करे।
उज्जवला योजना के लाभ
· स्वास्थ्य में सुधार: रसोई के धुएँ से होने वाली बीमारियों, जैसे- आँखों में जलन, साँस संबंधी रोग आदि, में कमी आई है।
· महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को धुएँ भरी रसोई में समय बर्बाद नहीं करना पड़ रहा और उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।
· पर्यावरण संरक्षण: ठोस ईंधन के जलने से होने वाले वायु प्रदूषण में कमी आई है।
· जीवन स्तर में सुधार: एलपीजी का उपयोग करना आसान, सुरक्षित और समय की बचत करने वाला है।
भविष्य की दिशा
उज्जवला योजना 2025 और उसके बाद भी देश में ऊर्जा न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत आधार बन चुकी है। भविष्य में सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि लाभार्थी न केवल कनेक्शन प्राप्त करें, बल्कि नियमित रूप से सिलिंडर का रिफिल भी करवाएँ। इसके लिए सस्ती दरों पर गैस उपलब्ध कराने और जागरूकता फैलाने पर काम जारी है।
निष्कर्ष
निस्संदेह,उज्जवला योजना भारत के सामाजिक-आर्थिक ढाँचे को मजबूत करने वाली एक मील का पत्थर साबित हुई है। 2025 तक इसने न केवल अपने प्रारंभिक लक्ष्यों को प्राप्त किया है, बल्कि एक टिकाऊ और स्वच्छ भविष्य की नींव रखी है। यह योजना ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र को चरितार्थ करती हुई, देश के हर घर की रसोई में उजाला और स्वच्छता लाने के अपने मिशन पर निरंतर अग्रसर है।







